सोमवार, 3 अक्टूबर 2016

कितने कारगर पुलिस सुधार

कविता राज


पुलिस कार्यप्रणाली में सुधार की मांग कई बार उठी है...हाल ही में दिल्ली और यूपी समेत देश के कई राज्यों में पुलिस के बर्बर रवैये और गैंगरेप जैसी आपरादिक वारदातों के बाद पुलिस प्रणाली में सुधार की वकालत फिर से होने लगी है...बहस छिड़ गई है कि देश के बड़े शहरों समेत छोटे शहरों में पुलिस कार्यप्रणाली कैसी है ..उन शहरों में पुलिस की कार्यशैली कैसी है जहां पुलिस कमीश्नर सिस्टम लागू है..सवाल उठवने लगे हैं कि पुलिस कमीश्नर सिस्टम बेहतर है या मौजूदा समय में मजिस्टि्रियल प्रणाली ज्यादा कारगर है....
अब सवाल ये है कि क्या सभी राज्यों में पुलिस कमीश्नर सिस्टम लागू होना चाहिए?
hdr....कहां है पुलिस कमीश्मर सिस्टम?
मौजूदा वक्त में पूरे देश में 47 पुलिस कमीश्मर है....कोलकाता में अंग्रेज़ों के ज़माने से ही ये व्यवस्था लागू है....
दक्षिण भारत के शहरों में इसे प्रमुखता से लागू किया गया है.....हरियाणा के अंबाला और फरीदाबाद में भी पुलिस कमीश्नर सिस्टम लागू है....जबकि बाकी जगहों पर डीजीपी और आईजी समेत एसएसपी स्तर के अफ़सर कानून व्यवस्था संभालते हैं....यूपी और बिहार जैसे बड़े राज्यों में पुलिस कमीश्नर सिस्टम लागू करने की मांग लंबे अरसे से हो रही है ...लेकिन यहां के आईएएस अधिकारियों का तका इसका पुरज़ोर विरोध करता आ रहा है....2007 में बीएसपी ने इसे अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया था लेकिन अधिकारियों के विरोध के चलते ये संभव नहीं हो पाया...
एसपी सरकार भी इस दिशा में कोई प्रयास करती नहीं दिखाई देती है ...मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां की पुलिस भी इसे अपनी पुरानी हसरत कहकर इसका समर्थन करती दिखती है..लेकिन यहां भी सरकार और नौकरशाहों के ढीले ढाले रवैये के चलते इस पर बात आगे नहीं बढ़ पाई है.....
क्यों होता है पुलिस कमीश्नर सिस्टम का विरोध ?
इस प्रणाली के अमल में आने से आईएएस अधिकारियों के अधिकार छिनने का खतरा बना रहता है...पुलिस कमीश्नर प्रणाली के तहत अधिकारियों को ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं....जबकि मौजूदा व्यवस्था में मजिस्ट्रेट के पास सारे अधिकार होते हैं....पुलिस को अपने इलाके में शांति व्यवस्था और कानून बनाए रखने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश पर निर्भर रहना पड़ता है.....
क्या है पुलिस कमीश्नर सिस्टम?
पुलिस कमीश्नर सिस्टम अंगिरेज़ों के ज़माने की व्यवस्था है
जिन शहरों की आबादी 10 लाख से ज्यादा है वहां कमीश्नर की नियुक्ति की जाती है
दिल्ली में 1979 में जेएन चतुर्वेदी की पहला पुलिस कमीश्नर बनाया गया
इस प्रणाली के तहत पुलिस के पास सीआरपीसी के तहत कई अधिकार आ जाते हैं...इसी अधिकार के तहत पुलिस को भीड़ को काबू करने के लिए उस पर लाठीचार्ज..फायरिंग .धारा 144 और आर्म्स लाइसेंस जैसी कार्यवाही की छूट मिल जाती है...
किसी होटल ..बार का लाइसेंस रद्द करने का भी अधिकार पुलिस के पास आ जाता है...
आरोपी पर जुर्माना लगाकर उसे जेल भेजने ,,,,,एनएसए यानू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून..नारकोटिक्स..एक्साइज़ संबंधी अधिकार भी पुलिस कमीश्नर के पास होते हैं.....
दूसरी ओर मजिस्ट्रिय सिस्टम में धारा 144 ...107 और 51 की पावर डीसी के पास रहती है....
Gfx out
पुलिस कमीश्नर सिस्टम को लागू करने की वकालत करने वालों का तर्क है कि ये इसके लागू होने से पुलिस नेताओं और अफ़सरों के हाथ का खिलौना नहीं रह पाएगी....जबकि दूसरी  ओर इसका विरोध करने वाले कहते हैं कि इससे पुलिस निरंकुश हो जाएगी..
जानकार कहते हैं कि पुलिस बल की संख्या बढ़ाने  और काम के बोझ को कम करना मौजूदा वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है.....पुलिस के जवानों का वेतन बढ़ाने और उन्हें आधुनिक करने की भी ज़रूरत है
जहां तक पुलिस प्रणाली में सुधार और संशोधित एक्ट को लागू करने की बात है ...तो अब तक कई राज्यों ने इश पर अमल नहीं किया है..5 साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित पुलिस एक्ट को लागू करने के आदेश भी दिए थे ....
नए एक्ट के तहत सुरक्षा आयोग का गठन करना होगा
जो पुलिस को कामकाज की निगरानी करेगा और राज्य सरकार  को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा...
आयोग की रिपोर्ट मानने के लिए सरकार बाध्य होगी और उसकी मनमर्ज़ी पर लगाम लग सकेगी..
नए एक्ट में डीजीपी की नियुक्ति वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए...और यहीं प्रक्रिया आईजी.....डीआईजी रेंज से लिए भी लागू करने की बात कही गई थी....
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पुलिस सुधार प्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट का पहला आदेश यही था कि पुलिस के कामकाज से राजनैतिक हस्तक्षेप खत्म किया जाए....कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सरकारों ने एक्ट के कुछ ही बिन्दुओं पर अमल किया....हालांमकि राज्य पुलिस कमीश्नर प्रणाली का लागू करने के लए लंबे समय से इंतज़ार में है....लेकिन आईएएस अधिकारियों का तबका ये नहीं होने देना चाहता...उस पर आए दिन  पुलिस की कारस्तानी इस मसले पर नई बहस भी छेड़ देती है....
कविता राज जी़ मीडिया

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