गुरुवार, 2 अप्रैल 2009

पाकिस्तान में आतंक

एक के बाद एक धमाके से दहलता पाकिस्तान ये हक़ीकत बयान करता है कि देश के अंदर संगठित आतंकियों की बहुत बड़ी तादाद मौजूद है..जो या तो सरकार की नाक के नीचे से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रही है ..या फिर पाक सरकार सब कुछ जानकर भी दुनिया के सामने इस सच को आने नहीं देना चाहती कि पाकिस्तान आतंक का गढ़ बन गया है..आतंकियों के इस सबसे बड़े पनाहगार देश पर एक महीने के अंदर दूसरा बड़ा आतंकी हमला इसके दावों की पोल खोल कर रख देता है..तीन मार्च को हथियारबंद लोगों ने श्रीलंकाई क्रिकेट टीम को निशाना बनाया...खिलाड़ी तो मामूली चोटों से उबर गए..लेकिन आठ से ज्यादा लोग इस हमले की भेंट चढ़ गए.. आतंकी अपने नापाक मंसूबों को बड़ी ही आसानी से अंजाम देते आ रहे हैं.और पाक सरकार कार्रवाई के नाम पर एंटी टेरेरिज्म का राग अलाप कर रह जाती है..लाहौर के मनावां में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की तीन मंजि़ला इमारत पर हुआ आतंकी हमला इसी महीने की दूसरी बड़ी वारदात है...ये हमला बताता है कि सुरक्षा की नाकामी या सुरक्षा बलों की मिलीभगत के चलते कैसे एक साथ 14 आतंकी पुलिस की वर्दी में सेन्टर के अंदर घुस जाते हैं और हज़ारों लोगों को निशाने पर ले लेते हैं..आतंकियों ने पेंतीस से अधिक लोगों को अपनी दरिंदगी का शिकार बना डाला....जबकि न जाने कितने लोग अभी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं..हमले के लिए दहशतगर्दों ने सुबह का समय चुना,,जब प्रशिक्षु और अन्य मॉर्निंग ड्रिल की तैयारी कर रहे थे..एकाएक शायद कोई भी यह समझ नहीं पाया कि ये क्या हुआ ? जब तक ये किसी को समझ में आता कई लाशें बिछ गई....अंधाधुध फायरिंग करते हुए दहशतगर्द इमारत पर कब्जा जमा चुके थे..जवानों ने जमकर मुकाबला किया..दिन पूरा होने तक ग्यारह अधिकारियों सहित 27 जवान इस हमले में मारे जा चुके थे..जवानों ने छह आतंकियों को जिंदा पकड़ लिया..जबकि ट्रेनिंग सेटंर से उन्हं बाहर खदेड़ने की मुहिम में आठ आतंकियों को जवानों ने ढेर कर दिया..गृह मंत्री तो हमेशा की तरह बाद में ही कुछ बालते हैं..रहमान मलिक ने भी रटे रटाए अंदाज में वही कहा..फतह हासिल हो गई है.आतंकियों को खदेड़ दिया गया है..और पकड़ा हुआ एक आतंकी पश्तो बोलता है जिससे आशंका है कि वह अफगानिस्तान का होगा..य़ानि रहमान ने इस बात से इनकार नहीं किया कि हमले के पीछे तालिबानी संगठन का हाथ हो सकता है...लेकिन जाने क्यों रहमान मलिक को यह बात कैसे समझ में आ गई कि तालिबानी पाकिस्तान में हमले करवा रहे हैं..विश्व बिरादरी और भारत के बार बार कहने के बावजूद भी पाक ने कभी इस बात को खुलकर नहीं स्वीकारा है कि देश को अंदर तालिबानी बहुत बड़ी संख्या में मौजूद हैं..स्वात पर तालिबान का कब्जा दुनिया में यह संदेश देने के लिए काफी था कि अब पाकिस्तान को तालिबान से कोई नहीं बचा सकता..बहरहाल देऱ आए दुरूस्त आए.....लेकिन क्या......बचेगा तब तक पाकिस्तान में... खैर,.....एक आतंकी को सेंटर के बाहर खड़े पुलिस के निगरानी विमान में चढ़ने की कोशिश के दौरान दबोच लिया गया......हमले में जो प्रशिक्षु बच गये है ..वह खुद को लक्की मान रहे है,,लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि ऐसा हमला पाकिस्तान में दोबारा नहीं होगा और आज जो जिंदा है वह कल ऐसे ही किसी और हादसे का शिकार होने से बच सकेगा.?.शायद हर कोई अब इसी जवाब की तलाश में है..और आतंक के खौफ के साय़े में जी रही पाकिस्तानी आवाम सरकार से भी यही सवाल कर रही है ..


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एक नज़र.............
पिछले दो सालों के दौरान पाकिस्तान की आवाम 12 बड़ी आतंकी वारदातों की गवाह बनी है..यहां की निर्दोष आवाम ने अपनों को खोने का दंश तो झेला ही है .....लोग दिन रात खौफ के साये में जिंदगी बसर करने को भी मजबूर हैं..
1.18 अक्तूबर साल 2007 का वह दिन शायद बडा़ ही मनहूस था..आठ सालों के बाद बेनज़ीर भुट्टो अपने वतन लौट रही थी...समर्थकों की भारी भीड़ जुटी थी उनके स्वागत के लिए ...तभी अचानक से उनके कारवां पर हमला कर दिया गया..बेनज़ीर तो बाल बाल बच गई लेकिन इस आत्मघाती धमाके में करीब 140 लोगों की मौत हो गई..चार सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए..
2..इसके बाद 21 दिसंबर को उत्तरी पाकिस्तान में एक मस्ज़िद पर हमला कर दहशतगर्दों ने फिर से अपने खौफनाक चेहरे की झलक दिखलाई..इस हमले में 50 लोग हलाक हो गए..
3. 27 दिसबंर 2007 को एक बार फिर से आतंकवादियों ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के काफिले को निशाना बनाया...भुट्टो उस समय रावलपिंडी में एक रैली कर रही थी..हमले में भुट्टो के सिऱ पर गोली लगी जिसके कारण उनकी मौत हो गई..जबकि कई और सुरक्षा कर्मियों सहित कई लोग मारे गए...भुट्टो की मौत पाकिस्तान ही नहीं बल्कि विश्व भर के लिए एक गहरा सदमा था..
4.16 फरवरी 2008 को पीपीपी के काफिले पर पाराचिनार में एक और आत्मघाती हमला हुआ जिसमें 37 लोग मारे गए..
5.29 फरवरी 2008 को तालिबान के गढ़ स्वात घाटी के मिन्गोरा में हुए आत्मघाती हमले में 44 निर्दोष लोगों को जाने गवांनी पड़ी..
6.पाक के उत्तरपूर्वी इलाके डेरा आदम खेल में 2 मार्च को आतंकियों ने दस्तक दी और फिर दिखाया तबाही का वो मंज़र जिसमें 43 लोगों की मौत हो गई..
7.इसके बाद भी आतंकियों का यह सिलसिला ऱुका नहीं और 10 मार्च को दहशतगर्दों ने फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के कार्यालय को ही निशाना बना डाला..इस हमले में 26 से अधिक लोग मारे गए..
8. छह जुलाई को लाल मस्जिद पर हुए सेना के हमले का एक साल पूरा हुआ तो आतंकियों ने इस दिन इस्लामाबाद में हमले कर 15 लोगों को मार डाला..
9.21 अगस्त को आतंकवादियों ने पाक की खास हथियार फैक्ट्री वाह में दो हमले कर 57 लोगों को मार डाला..जबकि सैंकड़ो घायल हो गए..
10.20 अक्तूबर इसके बाद पाकिस्तान की शान माने जाने वाले होटल मैरिएट पर भीषण हमला हुआ..जिसमें देशी विदेशी करीब 65 लोग मारे गए..
11.तीन मार्च 2009 को श्रीलंकाई टीम को दहशतगर्दी का सामना करना पड़ा था जब छह क्रिकेटर बाल बाल बच गए थे..लेकिन इस आतंकी हमले में बुरी तरह ज़ख्मी हो गए थे..यहां गनीमत ये थी कि भारत की तरह कई देशों ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान में खेलने से इनकार कर दिया था..नहीं तो उनका भी हाल खराब होता..
12. और 27 मार्च को हुए इस हमले की तो बैतुल्लाह मसूद ने ज़िम्मेदारी भी कबूल ली है...कि चैन से नहीं रहने देंगे...


हर रोज हो रहे यह धमाके और हमले आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं..क्या कहना चाहते हैं दहशतगर्द.....कट्टरपंथ को चुन ले पाक?......अभी तक सैन्य शासन के दबदबे से उबरने की कोशिश के बजाय.....अब फिर से दकियानूसी बन जाए..पाकिस्तान?
लेकिन आवाम की राय क्या है....?
आखिर वोट देने का अधिकार रखती है आवाम…..तो क्या सरकार उन्हें जीने का अधिकार मुहैया नहीं करा सकती है..ये क्या हो रहा है ..ज़रदारी और गिलानी के राज में? भुट्टो गई तो कुर्सी ज़रदारी के पास आई.....ज़रदारी ने शरीफ का पत्ता साफ कर मिस्टर हंडरेड परसेंट का सपना साकार कर लिया..मुशर्रफ गए तो दहशत से देश दहल गया.... क्या कर रहे हैं गिलानी और जनरल अशफाक कियानी?
देश की बागडोर संभालने वाले कहीं खुद की सुरक्षा के बंदोबस्त में मशगूल तो नहीं....ज़रदारी तो जानते हैं जो मुंह खोले उसे बंद करवा दो.....जियो टीवी ने ज़रदारी की नीतियों की निंदा की तो उस पर पाबंदी लगा दी....शेरी रहमान ने आपत्ति जताई....तो उन्हें भी बाहर का रास्ता देखना पड़ा...चौतरफा दबाव पड़ने पर ही हाल ही में बहाल हुए चौधरी इफ्तिकार ....शरीफ बंधुओं की नैया डुबोने के लिए भी ज़रदारी ने हर संभव चाल चली है..इंट्रस्टिंगली.....हर तरफ से निंदा झेलनी पड़ी ..प्रदर्शन और विरोध झेलना पड़ा तो ज़रदारी और गिलानी शरीफ बंधुओं को न्याय देने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाने को तैयार हो गए...आखिर इन सब बातों से क्या साबित कर लेंगे ज़रदारी....