सोमवार, 26 सितंबर 2016



निवेशकों को आकर्षित कर रहे हेल्थकेयर स्टार्टअप्स


कई स्वास्थ्य संकेतकों पर आधारित एक ताजा वैश्विक अध्ययन के नतीजों में भारत को 188 देशों की सूची में 143वें पायदान पर रखा गया है. यह स्थिति देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली बयां करती है. लेकिन, इस बीच अच्छी खबर यह है कि इनोवेटिव आइडियाज पर आधारित कुछ हेल्थकेयर स्टार्टअप्स देश  में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में मददगार साबित हो रहे हैं और इनमें व्यापक निवेश भी हो रहा है. जानते हैं इलाज को सुगम बनाते, डॉक्टर और दवाओं तक पहुंच आसान बनाते हेल्थ सेक्टर के कुछ स्टार्टअप्स के बारे में, जिनमें हाल के महीनों में निवेश होने की खबरें आयी हैं.

हेल्थकार्ट _
यह कंज्यूमर हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स, खासकर डाइटेरी सप्लीमेंट्स और मेडिकल उपकरण   मुहैया करानेवाला एक इ-कॉमर्स पोर्टल  है. ‘टेक इन एशिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले माह सिकोइया कैपिटल और अन्य निवशकों ने  इसमें 12 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिनका भारत में इ-कॉमर्स स्पेस में व्यापक कारोबार फैल चुका है.

पियांटा  -
हेल्थकेयर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेषज्ञों से सलाह के लिए समय लेने और फिजिकल थेरेपी, नर्सिंग व लैब सैंपल कलेक्शन करनेवाले इस स्टार्टअप को हाल के दिनों में सीड फंडिंग के जरिये निवेश की बड़ी रकम हासिल हुई है. यह अपना होम हेल्थकेयर प्रैक्टिस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी बेचता है, जो रीयल टाइम में स्टाफ को तलाशने और अन्य चीजों को मैनेज करने में मदद करता है व ग्राहक का डिजिटल रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखता है.
जॉक्टर-  
हेल्थ चेकअप के लिए डॉक्टर से समय लेने और लोंग टर्म इंटेंसिव केयर समेत क्रोनिक केयर आदि सेवाएं मुहैया करानेवाले इस स्टार्टअप में इस साल बड़ी रकम का निवेश हुआ है, जिसमें ब्रांड कैपिटल इन्क्यूबेटर की बड़ी हिस्सेदारी है. जुलाई, 2015 में स्थापित इस स्टार्टअप का कारोबार देश के अनेक बड़े शहरों तक फैल चुका है.

कर्मा हेल्थकेयर  -
यह स्टार्टअप डॉक्टरों और टेलीमेडिसिन की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराता है. आधुनिक तकनीकों के जरिये यह ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों का रीयल-टाइम डाटा डॉक्टरों के पास भेज कर उनका इलाज आसान बनाता है. इस वर्ष इसे भी घरेलू निवेशकों से बड़ी रकम हासिल हुई है.

मित्रा बायोटेक  -
यह बायोटेक फर्म कैंसर के मरीजों को आधुनिक तकनीक आधारित सेवाएं और इलाज मुहैया कराता है. बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर यह डॉक्टरों और मरीजों को कम-से-कम समय में समुचित इलाज की सलाह देता है. सिकोइया इंडिया और सैंड्स कैपिटल वेंचर ने पिछले माह इसमें व्यापक निवेश किया है, जिससे इस फर्म को 27.4 मिलियन डॉलर की रकम हासिल हुई है.
मेड जीनोम  -
यह जीनोमिक्स आधारित डायग्नोस्टिक और रिसर्च कंपनी है, जो क्लिनिकल, जेनेटिक काउंसलिंग और जीनोमिक्स सोलुशंस जैसी सेवाएं मुहैया कराती है. ओंकोलॉजी और कार्डियोलॉजी जैसी बीमारियों के क्लिनीकल जेनेटिक टेस्टिंग के लिए यह डीएनए सिक्वेंसिंग का इस्तेमाल करती है, जो डॉक्टरों को यह निर्धारित करने में मदद करता है कि ये दवाएं कैसी प्रतिक्रिया करती हैं. सिकोइया इंडिया, इमर्ज वेंचर ने इसमें अच्छा निवेश किया है.

हेल्थकेयर सेक्टर के स्टार्टअप्स में निवेश-
397.41 मिलियन डॉलर का कुल निवेश हुआ है इस वर्ष भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर में 88 फंडिंग डील्स के जरिये.

113.45 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर के स्टार्टअप में, 73 डील्स के माध्यम से.  

5,657 मिलियन डॉलर की कुल रकम हासिल हुई इस सेक्टर को वर्ष 2012 से अब तक, 558 फंडिंग डील्स के जरिये.

735 मिलियन डॉलर का निवेश हो चुका है हेल्थकेयर सेक्टर के स्टार्टअप में वर्ष 2012 से अब तक, 336 फंडिंग डील्स के माध्यम से. (स्रोत : वीसीसीएज)

कामयाबी की राह-
समान आइडिया के साथ शुरू हुए दो स्टार्टअप में से एक सफल हुआ और दूसरा डूब गया. आपको ऐसे अनेक उदाहरण मिल जायेंगे, जहां उस आइडिया ने एक उद्यमी को तो अरबपति बना दिया, लेकिन दूसरी ओर किसी अन्य को कुछ भी कमाई नहीं हुई. उदाहरण के तौर पर यूट्यूब से भी पहले 1997 में पहली वीडियाे शेयरिंग वेबसाइट शुरू हुई, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी. जबकि उसके बाद यूट्यूब और ऐसी कई ऐसी वेबसाइट कामयाब हो चुकी हैं. समान आइडिया पर काम करते हुए कुछ उद्यम आगे बढ़ जाते हैं, जबकि कुछ पिछड़ जाते हैं. विशेषज्ञों ने इसके निम्न संभावित कारण गिनाये हैं :

1. सटीक समय पर शुरुआत : किसी कारोबार को कामयाब बनाने में इसका सर्वाधिक योगदान माना जाता है. उदाहरण के तौर पर ओला और उबर ने ऐसे समय में बाजार में दस्तक दी, जब इस आइडिया पर आधारित पूरा मैदान खाली था. लिहाजा ग्राहकों और ड्राइवरों समेत कैब मालिकों को अपने साथ जोड़ने में ये सफल रहे.

2. आइडिया का कार्यान्वयन : हालांकि, किसी उद्यम को सफल बनाने में आइडिया को सबसे बड़ी भूूमिका में समझा जाता है, लेकिन उसका कार्यान्वयन कैसे किया गया है, यह उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है. जैसे गूगल ने बाजार की जरूरतों के अनुरूप अपने आइडिया को कार्यान्वित किया और दुनियाभर में फैल चुका है.

3. ग्राहकों की जरूरत : बदलते समय के साथ ग्राहकों की जरूरतों में बदलाव होता रहता है. इसलिए बदल रहे समय और उसके अनुरूप ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के बेहतर विकल्पों के बारे में आपको लगातार सोचते रहना होगा. अन्यथा कोई अन्य उद्यमी ग्राहकों की नब्ज पकड़ कर नये कंसेप्ट के साथ नया कारोबार शुरू कर सकता है और आपके ग्राहक उस ओर मुड़ सकते हैं.

4. बिजनेस मॉडल : आपके स्टार्टअप का बिजनेस मॉडल तय होना चाहिए और आपको इस बात की स्पष्ट समझ होनी चाहिए कि किस तरह के ग्राहकों से आपकी आमदनी आयेगी. शुरुआत में इसके लिए आपको एक सीमित दायरा लेकर चलना होगा.


टैक्स छूट लेने के लिए यहां से लें प्रमाण पत्र

पहले से ही अस्तित्व वाले किसी कारोबार के विभाजन या उसके पुनर्निर्माण के माध्यम से बनायी गयी किसी संस्था को ‘स्टार्टअप’ नहीं माना जायेगा. इस परिभाषा के मुताबिक पहचान किये गये किसी ‘स्टार्टअप’ को टैक्स छूट का लाभ हासिल करने के लिए अंतर-मंत्रालीय प्रमाणन बोर्ड से पात्र व्यवसाय का प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा, जिसमें निम्न शामिल हैं :

(क) संयुक्त सचिव, औद्योगिक नीति एवं

संवर्धन विभाग,

(ख) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रतिनिधि और

(ग) जैव-प्रौद्योगिकी विभाग के प्रतिनिधि.


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